★★★ग्रामगीतेला अभ्यासतांना★★★ "अब तो आँखे खोल अब तो आँखे खोल | बन्दे!" "अब तो आँखे खोल अब तो आँखे खोल | बन्दे! ।।टेक।। नीति गयी दुनियासे सारी। प्रीत हुई मतलब की प्यारी।। जिधर उधर छलबल,कामी जन। मिले न निर्मल बोल । बन्दे ! ।। १ ॥ पाप पुण्य का कहाँ गुजारा? धर्म घुपे गलि मारा-मारा। ईमानकी तो बात कहाँ है? बजे झूठके ढोल । बन्दे ! ।। २॥ बिगड़ गयी शासन की रीति। साम- दाम- दण्डन की नीति।। अपना -परका देख-देखकर, झुके न्याय का तोल। बन्दे ! ॥३।। कोई न तेरा यहाँ सहारा। जिसका वहि है तारनहारा ॥ कहाँ बन्धुता, सेवा, समता ? खुदी बढा निजमोल। बन्दे ! ।।४।। जगमें रहा प्रलय होनेका । या तो प्रभु के अवतरनेका।। तुकड्यादास कहे, मै बोला, अनुभव लेकर बोल । बन्दे ! ॥५॥" -राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज तुकडोजी महाराजांनी ग्रामशुद्धी, ग्रामनिर्माण, ग्रामरक्षण, ग्रामआरोग्य, ग्र...