***कवच***
"महात्मा फुलेंने लिखा बाताया हुवा इतिहास बहोत सुक्ष्मतासें समझ लेना चाहियें... क्यूँकी इस इतिहास की सुक्ष्मतांपर गलतफैमिेया,मिथ्या,झुंठेंपन और हिनता के कवच जंग लीये हो बैठी है...!
उसे सारविवेक की टोकसे कवच फोड़कर अस्सलता निकालनी होंगी...जोकीं हमे आत्मनिर्भरता,संघर्षसिख,ज्ञातापन दिलाता हैं...!"
सारविवेक की खोज मैं-विश्वा
***झुजलन***
"जात,धर्म,और वर्णवर्ग,उचनिचता खात्मा करने की जंग में हमे प्रज्ञा,आत्मखोज,सच्ची लगन और झुजलन आनी चाहीये....नाकीं हम दुमदुपट्टे पीठपीछेें भाग चले.समझ लो वह हमारी जंग के पहिली हार है....!"
जायजा लेता हुवा-विश्वा
***परिप्रेक्ष***
"अजूनही भारतीय परिप्रेक्षात फुले वैचारिक पातळीवर उमलले नाहीत.तिथे शिक्षण,नीती,वैज्ञायन आणि सत्सार विवेकाचे पाणी मुरले पाहिजे.मुक्तीचा विचार कळला पाहिजे.तेव्हा स्वातंत्र्य असेल...तोपर्यंत नाही!"
21व्या शतकातील-विश्वा




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