गझल
आईने के कर सौ तुकडे
अपने अंदर झाक करना...?
तनको ढके लाख कपडे
दिलके उपर झाक करना....?
बुरन करे बुरा बुरे लफडे
सत् ना बुरा झाक करना.....?
मुर्देने कींतना बोया
जीवही बंजर झाक करना
आईने के कर सौ तुकडे
अपने अंदर झाक करना...?
तनको ढके लाख कपडे
दिलके उपर झाक करना....?
बुरन करे बुरा बुरे लफडे
सत् ना बुरा झाक करना.....?
मुर्देने कींतना बोया
जीवही बंजर झाक करना
***शायर***
"रात गई सारी सदी गई
कही हूई मेरी बात गई...
क्या करूं मैं सिकवे ऐ दोस्त
मुफ्लिस दिल खैरात गई.....!"
शायर-विश्वनाथ साठे
उन्हाचे सावलीची भांडणे ही उपवर झाली
लपंडाव हा तसाच सुखेदुःख प्रखर आली
"दीदार करने के लिए गुल गुलजार हुए
तेरे आने की खबर में कितने बेजार हूए...
"हौसले तुटने न देना
फैसले मिटने न देना..!"
"शिकवे गिले जुदा हो गये
खामोश क्यू है दोस्त मेरे
दोस्ती पे हम तेरे कबसे
वहिंसे अब फिदा हो गये...!"
शायर-विश्वनाथ साठे
कवी- विश्वनाथ साठे
दिल कि सदाहे गिरे बांध रखना
कही पिघल न जाये निगाहे रखना
"हल ढुंढनेवालो बन्जर जमी पे
उपजाई नाही होत है...!
देख लो गिले मिट्टीकि रगो में
पसिनाई खाई जीत है...!
आज कल है काहा तुम्हारा
कठिनाई पाई नित है....!
शायर-विश्वनाथ साठ
े"बेहदखुशी खजाने में छिपी नही रे
कहता हु वक्त को...
मदहोशी ये जमाने में लिखी नही रे
लिखता हु दोस्त को......!"
शायर-विश्वनाथ साठे
" जाम पिलावे वह कोई काम नाही आवे
ऐ दोस्त मुझे चैनसे नाम तेरे नाही आवे..!
शायर -विश्वनाथ साठ
े"आईने के कर सौ तुकडे
अपने अंदर झाक करना...?"
"हात के खंजर फेको
दिल कि जंजिर लो
करलो दुनिया सब
साथ सच का हि देदो...!"
शायर-विश्वनाथ साठे
"तू उठाले रे गिरते हुये को
संभाले हम डरते हुये को...!"
शायर-विश्वनाथ साठे
"भारतवर्ष के सभी लोगोको ईद मुबारक हो...!"
***ईद मुबारक हो***
"तमन्ना-ए-दिले अल्लाह खुदाई
इन्सानियत कि न हो जुदाई
तख्ते-ए-ताज रुह-लब्ज कतरो में
तुझमें मैं हु मुझमें तू है इक इलाही
तू मैं इक हो विश्वलहू जिंदगी जैसे
यार इलाही खुदा यार रब रसुलाई....!
**सभी देशवाशियों को ईद मुबारक हो**
"रात गई सारी सदी गई
कही हूई मेरी बात गई...
क्या करूं मैं सिकवे ऐ दोस्त
मुफ्लिस दिल खैरात गई.....!"
शायर-विश्वनाथ साठे
उन्हाचे सावलीची भांडणे ही उपवर झाली
लपंडाव हा तसाच सुखेदुःख प्रखर आली
"दीदार करने के लिए गुल गुलजार हुए
तेरे आने की खबर में कितने बेजार हूए...
"हौसले तुटने न देना
फैसले मिटने न देना..!"
"शिकवे गिले जुदा हो गये
खामोश क्यू है दोस्त मेरे
दोस्ती पे हम तेरे कबसे
वहिंसे अब फिदा हो गये...!"
शायर-विश्वनाथ साठे
कवी- विश्वनाथ साठे
दिल कि सदाहे गिरे बांध रखना
कही पिघल न जाये निगाहे रखना
"हल ढुंढनेवालो बन्जर जमी पे
उपजाई नाही होत है...!
देख लो गिले मिट्टीकि रगो में
पसिनाई खाई जीत है...!
आज कल है काहा तुम्हारा
कठिनाई पाई नित है....!
शायर-विश्वनाथ साठ
े"बेहदखुशी खजाने में छिपी नही रे
कहता हु वक्त को...
मदहोशी ये जमाने में लिखी नही रे
लिखता हु दोस्त को......!"
शायर-विश्वनाथ साठे
" जाम पिलावे वह कोई काम नाही आवे
ऐ दोस्त मुझे चैनसे नाम तेरे नाही आवे..!
शायर -विश्वनाथ साठ
े"आईने के कर सौ तुकडे
अपने अंदर झाक करना...?"
"हात के खंजर फेको
दिल कि जंजिर लो
करलो दुनिया सब
साथ सच का हि देदो...!"
शायर-विश्वनाथ साठे
"तू उठाले रे गिरते हुये को
संभाले हम डरते हुये को...!"
शायर-विश्वनाथ साठे
"भारतवर्ष के सभी लोगोको ईद मुबारक हो...!"
***ईद मुबारक हो***
"तमन्ना-ए-दिले अल्लाह खुदाई
इन्सानियत कि न हो जुदाई
तख्ते-ए-ताज रुह-लब्ज कतरो में
तुझमें मैं हु मुझमें तू है इक इलाही
तू मैं इक हो विश्वलहू जिंदगी जैसे
यार इलाही खुदा यार रब रसुलाई....!
**सभी देशवाशियों को ईद मुबारक हो**
गीत(हिंदी)
येशुजी मेरी नय्या तुम ताराओ
भवसागर में है डूबती रही .....//धृ//
बरसों से विकार भरा है
नश्वर सारा झूठा संसार है
येशुजी मेरी पीड़ा तुम हराओ....//1//
इस नगरी में शैतान बहुत
आए हैं हमें वे लुटाने
येशुजी मेरी खताँ तुम उठाओ ....//2//
की है खड़ी वक्तने तूफाने
पुकार सुनो आओजी बचाने
येशुजी मेरी जान तुम छुड़ाओ....//3//
येशुजी मेरी नय्या तुम ताराओ
भवसागर में है डूबती रही .....//धृ//
बरसों से विकार भरा है
नश्वर सारा झूठा संसार है
येशुजी मेरी पीड़ा तुम हराओ....//1//
इस नगरी में शैतान बहुत
आए हैं हमें वे लुटाने
येशुजी मेरी खताँ तुम उठाओ ....//2//
की है खड़ी वक्तने तूफाने
पुकार सुनो आओजी बचाने
येशुजी मेरी जान तुम छुड़ाओ....//3//
गझल (हिंदी)
न जाने कौनसी रुत आई
दिल भीगा अंदरसे मेरा
नजरों से बरसात हो गई ...//1//
जमी बंजर थी हमसफर यादों की
ख्वॉब बोया है हरसफर तेरा
हाथ कोई अमानत है नहीं ...//2//
छुडाली जान अपनी यह तमन्ना से
तब जाकर सुहानी शानसे तेरा
साथ नई फुरसत है पाई ...//3//
सोचने को वक्त काफी नहीं इतनासा
अब जिंदगी में सही माफ़ी तेरा
बरसों से मुलाकात हुई.....//4//
न जाने कौनसी रुत आई
दिल भीगा अंदरसे मेरा
नजरों से बरसात हो गई ...//1//
जमी बंजर थी हमसफर यादों की
ख्वॉब बोया है हरसफर तेरा
हाथ कोई अमानत है नहीं ...//2//
छुडाली जान अपनी यह तमन्ना से
तब जाकर सुहानी शानसे तेरा
साथ नई फुरसत है पाई ...//3//
सोचने को वक्त काफी नहीं इतनासा
अब जिंदगी में सही माफ़ी तेरा
बरसों से मुलाकात हुई.....//4//
गझल (हिंदी)
उन्हें याद करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं .....//1//
जमाने को भुला करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं ....//2//
दिए थे लफ्ज़ खाकर कसमें
निभाने की कोशिश करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं....//3//
फुरसते ही नहीं उसे जमानेसे
बेवक्त इंतजार करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं....//4//
उन्हें याद करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं .....//1//
जमाने को भुला करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं ....//2//
दिए थे लफ्ज़ खाकर कसमें
निभाने की कोशिश करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं....//3//
फुरसते ही नहीं उसे जमानेसे
बेवक्त इंतजार करते हैं हम
उनको मालूम है कि नहीं....//4//
***भूल***
कमान से छूटे तिर जो
घायल शिकार होती है
जराशी भूल हो गई तो
जिंदगी बेकार होती है.....//धृ//
दुनिया यह ईक तमाशा
आने का वक्त ना जाने का
आता है जाता ओ रोजमर्रा
खेल है बना शमशान का
आने के बाद जाने की सोच
क्यू आनी मेरी कुल हो गई तो
दिखाव
है यहा सब कूच दिखावा
देखने से दीखता याद नहीं
आने सेही पहले था जो सो
लेकींन जाने के जो बाद नहीं
नजर नजह समझ ले प्यारे
नजरिया गुल हो गई तो....//1//
कमान से छूटे तिर जो
घायल शिकार होती है
जराशी भूल हो गई तो
जिंदगी बेकार होती है.....//धृ//
दुनिया यह ईक तमाशा
आने का वक्त ना जाने का
आता है जाता ओ रोजमर्रा
खेल है बना शमशान का
आने के बाद जाने की सोच
क्यू आनी मेरी कुल हो गई तो
दिखाव
है यहा सब कूच दिखावा
देखने से दीखता याद नहीं
आने सेही पहले था जो सो
लेकींन जाने के जो बाद नहीं
नजर नजह समझ ले प्यारे
नजरिया गुल हो गई तो....//1//
"रात गई सारी सदी गई
कही हूई मेरी बात गई...
क्या करूं मैं सिकवे ऐ दोस्त
मुफ्लिस दिल खैरात गई.....!"
उन्हाचे सावलीची भांडणे ही उपवर झाली
लपंडाव हा तसाच सुखेदुःख प्रखर आली
"दीदार करने के लिए गुल गुलजार हुए
तेरे आने की खबर में कितने बेजार हूए...
"हौसले तुटने न देना
फैसले मिटने न देना..!"
"शिकवे गिले जुदा हो गये
खामोश क्यू है दोस्त मेरे
दोस्ती पे हम तेरे कबसे
वहिंसे अब फिदा हो गये...!"
दिल कि सदाहे गिरे बांध रखना
कही पिघल न जाये निगाहे रखना
"हल ढुंढनेवालो बन्जर जमी पे
उपजाई नाही होत है...!
देख लो गिले मिट्टीकि रगो में
पसिनाई खाई जीत है...!
आज कल है काहा तुम्हारा
कठिनाई पाई नित है....!
"बेहदखुशी खजाने में छिपी नही रे
कहता हु वक्त को...
मदहोशी ये जमाने में लिखी नही रे
लिखता हु दोस्त को......!"
" जाम पिलावे वह कोई काम नाही आवे
ऐ दोस्त मुझे चैनसे नाम तेरे नाही आवे..!
"आईने के कर सौ तुकडे
अपने अंदर झाक करना...?"
"हात के खंजर फेको
दिल कि जंजिर लो
करलो दुनिया सब
साथ सच का हि देदो...!"
"तू उठाले रे गिरते हुये को
संभाले हम डरते हुये को...!"
"भारतवर्ष के सभी लोगोको ईद मुबारक हो...!"
कही हूई मेरी बात गई...
क्या करूं मैं सिकवे ऐ दोस्त
मुफ्लिस दिल खैरात गई.....!"
उन्हाचे सावलीची भांडणे ही उपवर झाली
लपंडाव हा तसाच सुखेदुःख प्रखर आली
"दीदार करने के लिए गुल गुलजार हुए
तेरे आने की खबर में कितने बेजार हूए...
"हौसले तुटने न देना
फैसले मिटने न देना..!"
"शिकवे गिले जुदा हो गये
खामोश क्यू है दोस्त मेरे
दोस्ती पे हम तेरे कबसे
वहिंसे अब फिदा हो गये...!"
दिल कि सदाहे गिरे बांध रखना
कही पिघल न जाये निगाहे रखना
"हल ढुंढनेवालो बन्जर जमी पे
उपजाई नाही होत है...!
देख लो गिले मिट्टीकि रगो में
पसिनाई खाई जीत है...!
आज कल है काहा तुम्हारा
कठिनाई पाई नित है....!
"बेहदखुशी खजाने में छिपी नही रे
कहता हु वक्त को...
मदहोशी ये जमाने में लिखी नही रे
लिखता हु दोस्त को......!"
" जाम पिलावे वह कोई काम नाही आवे
ऐ दोस्त मुझे चैनसे नाम तेरे नाही आवे..!
"आईने के कर सौ तुकडे
अपने अंदर झाक करना...?"
"हात के खंजर फेको
दिल कि जंजिर लो
करलो दुनिया सब
साथ सच का हि देदो...!"
"तू उठाले रे गिरते हुये को
संभाले हम डरते हुये को...!"
"भारतवर्ष के सभी लोगोको ईद मुबारक हो...!"
***ईद मुबारक हो***
"तमन्ना-ए-दिले अल्लाह खुदाई
इन्सानियत कि न हो जुदाई
तख्ते-ए-ताज रुह-लब्ज कतरो में
तुझमें मैं हु मुझमें तू है इक इलाही
तू मैं इक हो विश्वलहू जिंदगी जैसे
यार इलाही खुदा यार रब रसुलाई....!”
"सीप बनके ना रहे समिंदर के बंधन में ना शिप के आँचल में रहू मैं मोती....
उलट राह मेरी मैं दरीया चढा जाऊ जल मेरा घर मेरा जलसे ना प्यास बुझाती....."
"जाम खाली खाली पैमाना है नहीं
जज्बातो में छलकना बहाना नहीं....!"
"सागर को क्या गम लहरे जो समाई है
गम तो गोताखोरो को गहरे जो समाई है.....!"
मै कमी अब म्हसूस कर ऱ्हाहु
की प्यार में मैं तुंहे कही
कम तो प्यार नही कर ऱ्हाहु
मार दे हातोसे तुही मेरे कब्र पर 'तेरा निशान
जिंदगी युही मेरी दरबदर भटक्ती खुलेआम
बहुत खूब......
पतंगो की तरह होती है ख्वाँइसे
दिलसे दिया बुझा जाती है ख्वाँऐसे...
धुव्वा होता है जात अस्मान में कही
अर्ज काफी नज्म होती है ख्वाँइसे....
--------/--////विश्व------//////
वक्त पर नही असूं मेरे सुखे
बेवक्त क्या पोछने तुम आते
अब रूको नही
यह
यह तुम पर जजता नहीं के मनाओ मातम
यह तुम पर जजता नहीं के मनाओ मातम
और करो देर
तुम्हें तुम्हें मिली है विरासत
भीगी हुई साथियों
के खुशी से सही गर्भवती सहती रही पीड़ा
और इंतजार तुम्हारा
बोझल समय का दबाव पड़ता कंधों पर
गर्दन पर
अब उठो तोड़ दो चमकती सुबह की पाठ खोल दो
यह
यह तुम पर जजता नहीं के मनाओ मातम
यह तुम पर जजता नहीं के मनाओ मातम
और करो देर
तुम्हें तुम्हें मिली है विरासत
भीगी हुई साथियों
के खुशी से सही गर्भवती सहती रही पीड़ा
और इंतजार तुम्हारा
बोझल समय का दबाव पड़ता कंधों पर
गर्दन पर
अब उठो तोड़ दो चमकती सुबह की पाठ खोल दो
|
***इक संघर्ष क्या हैं...???***
"हर जानदार की इक तकदीर होती है मेरी कोई तकदीर नहीं सच्चाई की राह पर चलने वाला मुसाफिर निगाहें अहेम रखकर इक ही मक्सद के लिए हम बने हैं और वह मक्सद है सच्चाई ईमान रखने वाले ईमान नही बेचते तकदीर नहीं सोचते खत्म होती होगी यह जहाँ की नसीहत और खो जाएगा जहाँ तकदीरों का अपनी ख्वाहिंशो के लिए अब हमारे एकीन में सच्चाई का इंतेकाम है अब हमारे एकीन का सच्चाई से इंतेकाम है और हम इंतेकाम रखने वाले हैं सच्चे जलाए रखेंगे दिल और जख्म की नाह अभी जंग बाकी है क्यूँकि जुल्म के खिलाफ मजलूमों के कुर्बानियों के हक में आओ मिलकर आखरी सांस तक मिलकर निफाह करें टूट करें डट कर उन दुश्मनों के खिलाफ वह हमारी जो रुहतक दुश्मन है लहूँ के कतरे कतरे का जहरीला दुश्मन और कुछ ऐसा करें कि हमारे बाद मौत की आनेवाली हर इक नस्ल समझ सके कि एक जंग क्या है..??? इक जानदार क्या है...??? इक संघर्ष क्या है....???" 24/9/1017 |
|
***समय.....और....कुछ उलझन...***
जब समय आएगा ... जब समय आएगा किसी की चिल्लाहट नहीं सुनेंगे.. नहीं,तुम्हारी भी नहीं... कौन रो रहा है? कौन आँसू आँसू ?? चले जाओ ...! लड़ना जरूरी हैं इस दौर पर ... खून हैं जब तक ..... ओह ...! यहां कुछ जंगली जानवर हैं अपने सहयोगियों के साथ कट ..कर्तुते से काले छल,कपट विनाशकारी,मुर्दा जैसे .... जहां आप क्षय होने जा रहे हैं ??? लेकिन यह रोक क्यूँ नहीं पाते हैं??? आखिर क्यूँ??क्यूँ नही?? होने जा रहा है ..... आज दर्द और पीड़ा पीड़ित करते हुए टूट जाएगा ... जारी रहेगा जब तक भूख और दुख समाप्त हो जाते हैं, मानवता तक अब के बारे में परवाह नहीं है क्या हजारों सालों के लिए रहता है अनंत बनने के लिए ...... यह कल समय नहीं था अभी भी नहीं, जैसा कि वह वापस था अब उन दिनों में क्या हुआ है परिवर्तन, परिवर्तन ला रहा है .... जब समय आएगा ...उलझन लाएगा जब समय आएगा ... और समय फिर से आता ... निश्चित रूप से! |
|
***लफ्जो की जायदाद***
"क्यों कहां नहीं खयाल अपने दिल का लफ्जों में रुह देता मैं अपनी आवाज को बिखरा दिल है सिर्फ यह अप्स बनके सरेआम चुभते गए अपनी आगाज को किस्ते यार रुकावट तलबगार जर्राहट किनारों की लहरों की तकदीर भी क्या लहराती है बेवक्त का इंतजार रहता है आंखों की सदाह को दुश्मनों की क्या ली दिल में तनहाइयां तुमने दोस्तों ने मुझे गुमराह किया भरे सड्कमें वाकया मिले इस कदर वक्त पर हर दास्ता को कहने की लफ़्ज़ जायदाद थी तुम्हें क्यों नहीं कहा की कीमत थी क्या उसकी मयखाने खाने के दरिंदे गरीब हम ले खरीद करते शब हुए रब वे रियाजते मेरे थे नहीं थे कल सुबह हो जाएगी कटघरें दरबार में दरबदर ना भटकते रहना फिर मेरे आदाब को...! 27/9/2017 मुझे शब्दों में मेरी आवाज पसंद है बिखरे हुए दिल केवल काच के तुकडे अचानक उसकी शुरुआत शुरू हुई इन गुटों, जैसे विरोधी बाधा की आदत लहर क्या है? अंधा की आंखों की दृष्टि प्राप्त करने के लिए क्या आप जानते हैं कि हमारे दिल में दुश्मन क्या हैं? दोस्तों ने मुझे सड़क से गुमराह किया इस समय सभी लोग कहने के लिए एक हँसते हुए जगह थी वही जो नहीं कोई कीमत वे कीमत भी क्यों नहीं जानते गरीब लोग भोजन खरीद रहे थे और खरीदते थे और जो खाने के मारे थे वह मृत मेरी नहीं थे अदालत में, कल सुबह फिर से अदालत में मत जाओ |
***कौन***
"अकेले ही दूर खेती में,,,
और दूर ही दूर खेती,,
झिलमील हवाई,,,लहर
और,,
हाथ में लेके कोई फुल,,,,
है थमा कोई,,,,
और दूर ही दूर खेती,,
झिलमील हवाई,,,लहर
और,,
हाथ में लेके कोई फुल,,,,
है थमा कोई,,,,
शायद..…!
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